Indus Valley Civilization In Hindi : सिन्‍धु सभ्‍यता सामान्य ज्ञान

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Indus Valley Civilization In Hindi : सिन्‍धु सभ्‍यता सामान्य ज्ञान 

दोस्तों , आज हम Notes In Hindi Series में आपके लिए लेकर आये हैं सिन्‍धु सभ्‍यता से सम्बन्धित सामान्य ज्ञान! Indus Valley Civilization In Hindi (Sindhughati Sabhyata) से सम्बन्धित बहुत से Questions Competitive Exams में पूछे जाते हैं , यह एक बहुत ही विशेष Part आता है हमारे Gs का | तो आज हम पढेंगे Indus Valley Civilization In Hindi के बारे में !

Indus Valley Civilization In Hindi : Sindhughati Sabhyata

  • सिन्‍धु सभ्‍यता की खोज 1921 में दयाराम साहनी ने की।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता भारत की प्रथम नगरीय सभ्‍यता थी।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता का काल मेसोपोटामिया एवं मिस्‍त्र की सभ्‍यता के समकालीन थी।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता को हड़प्‍पा सभ्‍यता के नाम से भी जाना जाता है, क्‍योंकि सिन्‍धु सभ्‍यता में सर्वप्रथम हड़प्‍पा नामक स्‍थल की खोज हुई।
  • सन् 1922 ई० में राखाल दास बनर्जी ने मोहनजोड़ो की खोज की।
  • सुत्‍कागेंडोर सिन्‍धु सभ्‍यता के सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्‍थल, आलमगीरपुर पूर्वी पुरास्‍थल, माँडा (जम्‍मू) उतरी पुरास्‍थल तथा भगतराव दक्षिणी पुरास्‍थल है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता का इतिहास आद्य ऐतिहासिक (Proto- historic) काल का इतिहास है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता का विस्‍तार 12,99,600 वर्ग किमी, में उत्‍तर से दक्षिण की ओर त्रिभुजाकार आकृति में था।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता में मेडिटैरेनियम (भू-मध्‍यसागरीय) प्रजाति की जनसंख्‍या अधिक थी।
  • अभी तक सिन्‍धु सभ्‍यता के 1000 से अधिक स्‍थल भारत के विभिन्‍न क्षेत्रों से खोजे जा चुके हैं।
  • गुजरात में सिन्‍धु सभ्‍यता के सर्वाधिक स्‍थल खोज गए हैं।
  • लोथल से गोदीवाड़ा ( बंदरगाह), मकान बनाने का कारखाना एवं कपास के साक्ष्‍य मिले है।
  • अल्‍लादीनोंहसिन्‍धु सभ्‍यता का सबसे छोटा स्‍थल था।
  • ‘धौलावीरा’ सिन्‍धु सभ्‍यता का तकनरीकी रूप से सर्वाधिक विकसित स्‍थल था।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता (Indus Valley Civilization) के काल निर्धारण का नवीनतम स्‍त्रोत रेडियोकाबर्न विधि है।

-:सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के प्रमुख नगर और खोजकर्ता :-

केन्‍द्र खोजकर्ता वर्ष नदी तट
हड़प्‍पा दयाराम साहनी 1921 ई० रावी
मोहनजोदड़ो राखालदास बनर्जी 1922 ई० सिन्‍धु
दन्‍हूदड़ो एन०जी० मजूमदार 1931ई० सिन्‍धु
रंगपुर एस०आर० राव 1953 ई० भोगावर
लोथल  एस० आर० राव 1955-62ई० भोगवा
धौलावीरा आर० एस० विष्‍ट 1990 -91 ई० भोगवा
बनावली आर० एस० विष्‍ट 1973 -74 ई० रंगोई
कालीबंगन बी०बी०लाल 1953 ई० घग्‍गर
रोपड़ वाई० डी० शर्मा 1953-56 ई० सतलज
कोटदीजी फजल अहमद 1953 ई० सिन्‍धु
डावर कोट मैके 1932 ई० सिन्‍धु
सुतकागेंडोर ओ० स्‍टाईन 1927 ई० दशक
आलमगीरपुर यज्ञ दत्‍त शर्मा 1958 ई० हिण्‍डन

 

  • रेडियो कार्बन (C14) विधि से प्राप्‍त जानकारी से इस सभ्‍यता का कालानुक्रम 2350-1750 ई० पू० तक माना गया है।
  • मोहनजोदड़ो का अर्थ ‘मुर्दो का टीला’ होता है।
  • भारत में सबसे बड़ा सिन्‍धु सभ्‍यता का स्‍थल धौलावीरा (कच्छ, गुजरात) तथा राखीगढ़ी था।
  • मोहनजोदड़ो से हड़प्‍पा सभ्‍यता के मशहूर काँस्‍य नर्तकी की प्रतिमा मिली है।
  • अत: सिन्‍धु-घाटी सभ्‍यता काँस्‍ययुगीन सभ्‍यता थी।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोथल नगर से युग्मित शवाधान का साक्ष्‍य मिला है।
  • बनवाली से खिलौना तथा हल की प्रा‍प्ति हुई है।
  • काली बंगा से जोते हुए खेत एवं नक्‍काशीदार ईंटों के प्रमाण प्राप्‍त हुए है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता की भाव-चित्रात्‍मक लिपिको लिखने की तकनीक बुस्‍त्रोफेंडन कहलाती है।
  • रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं, जिनसे धान की खेती होने का प्रमाण मिलता है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगों का मुख्‍य पेशा कृष्ज्ञि एवं पशुपालन था, गेहूँ , कपास , जौ, राई, मटर एवं खजूद आदि की खेती करते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोग बैल, ऊँट, भैंस, भेंड़, गधे, बकरी, सुअर हाथी, कत्‍ते एवं बिल्‍ली पालते थे।
  • हड़प्‍पा सभ्‍यता के लोग कुबड़ वाले साँड़ की पूजा करते थे।
  • हड़प्‍पा सभ्‍यता के लोग पशुपति एवं शिव की पूजा करते थे।
  • सुरकोतदा, कालीबंगन तथा लोथल से घोड़े की हड्डियों के अवशेष मिले है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता का स्‍थल सुतकाकोह ‘शादीकौर’ नदी, बालाकोट विदार नही तथा आमरी नाम स्‍थल सिन्धु नदी के किनारे स्थित है।
  • हड़प्‍पा पाकिस्‍तान के पश्चिमी पंजाब प्रान्‍त के मांटगोमरी जिले में स्थित है।
  • मोहनजोदड़ो पाकिस्‍तान के सिन्‍ध प्रान्‍त के मांटगोमरी जिले में स्थित है।
  • बहावलपुर (राजस्‍थान) सूखी नदी ‘सरस्‍वती’के किनारे स्थित है।
  • सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के सबसे बाद में (1974 ई०) खोजा गया स्‍थल बनवाली है।
  • सिन्धु घाटी सभ्‍यता के लोग सम्‍भवत: बेबीलोन के साथ व्‍यापारिक सम्‍बन्‍ध थे, इस बात का प्रमाण सुरकोतदा नगर से मिलते हैं।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के आर्थिक जीवन कृषि पर निर्भर थी।
  • सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के लोगों का समाज चार भागों में विभक्‍त था- व्‍यापारी, विद्वान श्रमिक तथा सैनिक।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगों के मनोरंजन के प्रमुख साधन-नृत्‍य संगीत, चौसर एवं शतरंज थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के समाज में व्‍यापारी वर्ग का विशेष योगदान था।
  • सभ्‍यता का प्रशासन संभवत: व्‍यापारी वर्ग के हाथ में था।
  • सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता में वस्‍तु- विनिमय प्रणाली प्रचलित थी।
  • माप-तौल की इकाई सम्‍भवत: 16 के अनुपात में ( 16, 32, 64, 128, 256,…) थी।
  • सिन्‍धु क्षेत्र में मापनेके लिए कई स्‍केल पाये गये हैं, इनमें एक दशमलव स्‍केल भी है।
  • दशमलव स्‍केल की लम्‍बाई 13.2 ईंच है, इसका एक भाग 1.32 ईंच का है।
  • कालीबंगन का अर्थ होता है काले रंग की चूडि़याँ, यहाँ से शल्‍य-क्रिया के साक्ष्‍य मिले हैं।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता में अन्तिम संस्‍कार का बसे प्रचलित तरीका शवाधान ( शव को दफनाया जाना ) था।
  • पर्दा-प्रथा एवं वेश्‍यावृत्ति सिन्‍धु सभ्‍यता में प्रचलित थी।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के निवासी सूती एवं ऊनी वस्‍त्रोंका प्रयोग करते थे तथा वृक्ष –पूजा करते  थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोग यातायात के लिए दो पहियों वाली बैलगाड़ी या भैंसगाड़ी का उपयोग करते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोग मिठास के लिए शहद का प्रयोग करते थे।
  • रंगपुर एवं लोथल से चावल के दाने मिले हैं जिनसे धान की खेती का प्रमाण मिलता है।
  • पिग्‍गट महोदय ने हड़प्‍पा एवं मोहनजोदड़ों को एक विस्‍तृत साम्राज्‍य की जुड़वाँ राजधानी की संज्ञा दी थी।
  • कपास उगाने के कारण समकालन मिस्‍त्र सभ्‍यता के लोग सिन्‍धु क्षेत्र को शिंडन कहते थे।
  • कपास उगाने के कारण ही मेसोगपोटामिया के लोग सिन्‍धु क्षेत्र को मेलूहा कहते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगों ने नगरों तथा घरों के विन्‍यास के लिए ग्रिढ पद्धति अपनाई।
  • सिन्‍धु घाटी सभ्‍यता के हड़प्‍पा नगर से एक ही आकार के छोटे-छोटे घरों की एक बस्‍ती मिली है, जो सम्‍भवत: तत्‍कालीन श्रमिकों का निवास स्‍थान रहा हो।
  • उपर्युक्‍त बस्‍ती के आगे 16 भट्ठियाँ मिली हैं, जो सम्‍भवत:ताँबा गलाने का कारखाना है।
  • सिन्धु घाटी सभ्‍यता की सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थी और सड़कों का निर्माण अधिकांशता: कच्‍ची ईंटों से किया गया था।
  • भवन का दरवाजा औगर खिड़कियाँ सड़क‍ की ओर न खुलकर पिछवाड़े की ओर खुलते थे।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोगों के लिए पीपल का वृक्ष सर्वाधिक पूजनीय था।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के मोहनजोदड़ो से मातृदेवी के गर्भ से उगता हुआ वृक्ष वाला शील प्राप्‍त हुआ है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के लोग कई स्‍थलों के ताबीजोंके प्रयोग के साक्ष्‍य मिले हैं।
  • लोथल से फारस की मुहरें तथा कालीबंगा से ऊँट की हड्डियों के साक्षय मिले हैं।
  • लोथल से फारस की मुहरें तथा कालीबंगा से ऊँट की हड्डियों के साक्ष्‍य मिले हैं।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के स्‍थल राणा गुंडई के निम्‍नस्‍तरीय धतरातल की खुदाई में घोड़े के दाँतों के अवशेष प्राप्‍त हुए हैं।
  • भारतीय गैंडा का एकमात्र प्रमाण आमरी से प्राप्‍त हुआ है।
  • हड़प्‍पा के पूर्वी टीले को नगर टीला एवं पश्चिमी टीले को दुर्ग टीला की संज्ञा दी जाती है।
  • मोहनजोदड़ों , गणवारी वाला, लोथल,, कालीबंगन, हड़प्‍पा धौलावीरा आदि बड़े नगर थे।
  • सभ्‍यता के स्‍थल में प्रवेश करने वाला पहला चौराहा ऑक्‍सफोर्ड सर्कस कहलाता है।
  • नगर के पश्चिमी टीले पर बनाई गई सुरक्षा प्राचीर को दुर्ग कहा जाता था।
  • मोहनजोदड़ों से प्राप्‍त वृहत स्‍नानागार एक प्रमुख इमारत है, जिसके मध्‍य स्थित स्‍नानकुण्‍ड 11.88 मीटर लम्‍बा,01 मीटर चौड़ा एवं 2.43 मीटर गहरा है।
  • जल-कुण्‍ड में उतरने के लिए 2.44 मीटर चौड़ी सीढि़याँ थी।
  • मोहनजोदड़ों से प्राप्‍त अन्‍नागार सम्‍भवत: सिंधु सभ्‍यण्‍ता की सबसेबड़ी इमारत है।
  • हड़प्‍पा से 6 अनाज –शालाऍ मिलीं हैं।
  • दुर्ग के दक्षिण में 20 स्‍तंभों वाला वर्गाकार सभा भवन स्थित था।

सिन्‍धु सभ्‍यता से प्राप्‍त खनिज / रत्‍न और उनके स्‍त्रोत

खनिज/रत्‍न स्‍त्रोत खनिज/रत्‍न स्‍त्रोत
ताँबा ओमान, खेतरी सीसा दक्षिण भारत
टिन अफगानिस्‍तान, हजारीबाग रेड कलर हारमू तट
शिलाजित हिमालय क्षेत्र कार्नेलियन गुजरात‍/सिन्‍धु
लाजवर्द मणियाँ कश्‍मीर/अफगानिरस्‍तान फिरोजा एवं हरिताश्‍म मध्‍य एशिया
अंबुमणि‍ महाराष्‍ट्र गोमेद, स्‍फटिक सौराष्‍ट्र
नील रत्‍न बदख्‍शाँ शंख एवं कौडि़याँ सौराष्‍ट्र
अलबस्‍टर बलूचिस्‍तान बिटुमन मुसारवेल
स्‍लेटी पत्‍थर राजस्‍थान जमुनिया पत्‍थर दक्‍कन क्षेत्र रंगपुर
सोना अफगानिस्‍तान जेस्‍पर
चाँदी अफगानिस्‍तान, ईरान, ब्‍लूचिस्‍तान, अरब
  • हड़प्‍पाई लिपि में लगभग 64 मूल चिन्‍ह एवं 250 से 400 अक्षर है।
  • सिन्‍धु सभ्‍यता के पतन का प्रमुख कारण सम्‍भवत: बाढ़ था
  • पंजाब प्रान्‍त के मॉन्‍टगोमरी जिले में स्थित हड़प्‍पा के सामान्‍य आवास क्षेत्र के दक्षिण में एक कब्रिस्‍तार था, जिसे ‘ समाधि’ R -37’ कहा जाता है।

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