(Last Updated On: August 13, 2018)

Governer Work & Power In Hindi : राज्‍यपाल का कार्यभार एवं शक्ति 

नमस्‍कार दोस्‍तों, आज मैं आपको राज्‍यपाल के बारे में पूरी जानकारी देंगे उनका कार्य क्‍या है और उनकी शक्तियां क्‍या है इसकी विस्‍तृत जानकारी देने जा रहें है। Governer [Rajyapal] से सम्बन्धित बहुत से Questions Competitive Exams में पूछे जाते हैं , यह एक बहुत ही विशेष Part आता है हमारे Gs का | तो आज हम पढेंगे Governer Work & Power In Hindi,Governer Ke baare Me Puri jankari के बारे में !

जो कि निम्‍न प्रकार है-

  • राज्‍य की कार्यपालिक का प्रधान राज्‍यपाल होता है।
  • संविधान के अनुच्‍छेद -153 के अनुसार प्रत्‍येक राज्य के लिए एक राज्‍यपाल होता है, जिसकी नियुक्ति राष्‍ट्रपति द्वारा 5 वर्षों के लिये की जाती है।
  • 1956 ई० में अनुच्‍छे- 153 में संशोधन कर यह उपबन्‍ध जोड़ा गया कि राज्‍यपाल एक समय में एक से अधिक राज्‍यों का राज्‍यपाल हो सकता है।
  • राज्‍यपाल राज्‍य में राष्‍ट्रपति का प्रतिनिध होता है।
  • यद्यपि राज्‍यपाल का कार्यकाल 5 वर्षों का हेाता है, पर वह राष्‍ट्रपति के प्रसादपर्यन्‍त पद पर बना रह सकता है। वह अपना त्‍याग पत्र किसी भी समय राष्‍ट्रपति को दे सकता है।
  • वह सम्‍बन्धित राज्‍य के उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा शपथ ग्रहण करता है।
  • राज्‍यपाल पद पर नियुक्ति के लिये निम्‍नलिखित योग्‍यताएँ निर्धारित की गयी हैं –
  1. वह भारत का नागरिक हो,
  2. वह 35 वर्ष की आये पूरी का चुका हो,
  3. वह केन्‍द्र या राज्‍य सरकार तथा सार्वजनिक उपक्रम में कोई लाभ का पद धारण नहीं करता हो।
  4. राज्‍य विधान सभा का सदस्‍य चुने जाने योग्‍य हो।
  • कोई भी व्‍यक्ति एक से अधिक बार राज्‍यपाल के पद पर नियुक्‍त हो सकता है।
  • राज्‍यपाल को 3.5 लाख रू० प्रतिमाह वेतन, नि:शुल्‍क सरकारी आवास तथा संसद द्वारा समय-समय पर निर्धारित भत्‍ता एवं अन्‍य सुविधायें उपलब्‍ध हैं।
  • पदावधि के दौरान कोई अलाभकारी परिवर्तन नही हो सकता ।
  • राज्‍यपाल अपने कार्यों के लिये किसी न्‍यायालय के प्रति उत्‍तरदायी नहीं है।
  • राज्‍यपाल के विरूद्ध किसी न्‍यायालय में किसी प्रकार की आपराधिक कार्यवाही नहीं प्रारम्‍भ की जा सकती है।
  • राज्‍य के समस्‍त कार्य राज्‍यपाल के नाम व हस्‍ताक्षर से होते है, क्‍योंकि राज्‍य कार्यपालिका की शक्ति राज्‍यपाली में निहित है।
  • राज्‍यपाल विधानसभा के बहुमत दल/दलों के गठबंधन के नेता को मुख्‍यमन्‍त्री नियुक्‍त  करता है। तथा मुख्‍यमंत्रीकी सलाह से अन्‍य मंत्रियोंको नियुक्‍त करता है।
  • वह राज्‍य के महाधिवक्‍ता, लोक सेवा आयोग के अध्‍यक्ष एवं सदस्‍यों तथा अन्‍य उच्‍चाधिकारियों की नियुक्ति करता है।
  • राज्‍य में संवैधानिक संट उपस्थित होने की स्थित में वह अनुच्छेद -356 के तहत राष्‍ट्रपति को राज्‍य में राष्‍ट्रपति शासन (President Rule) लागू करनेकी सिफारिश कर सकता है।
  • अनुच्‍छेद -174 के अनुसार वह राज्‍य विधान मण्‍डल का सत्र आहूत कर सकता है, स्‍थगित कर सकता है तथा राज्‍य विधानसभा को भंग कर सकता है।
  • राज्‍य विधान सभा में आंग्‍ल-भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्‍व नहीं होने पर किसी एक आंग्‍ल-भारतीय समुदाय के व्‍यक्ति को सदस्‍य के रूप में मनोनीत कर सकता है।
  • कोई भी विधेयक विधानसभा तथा विधानपरिषद में पारित होने पर राज्‍यपाल के हस्‍ताक्षर के बाद ही कानून का रूप लेता है।
  • किसी सदस्‍य का आयोग्‍यात से सम्‍बन्धित प्रश्‍न पर वह निर्वाचन आयोग की सलाह से निर्णय देता है।
  • वह सामान्‍य आम चुनाव के बाद प्रारम्‍भ होने वाले विधानमण्‍डल के प्रथम सत्र को सम्‍बोधित करता है।
  • राज्‍य विधान सभा में राज्‍यपाल की अनुमति से ही धन-विधयेक (Money Bill) प्रस्‍तुत किया जा सकता है।
  • राज्‍यपाल को अनुच्छेद-202 के अन्‍तर्गत जिला न्‍यायाधीशों और अन्‍य न्‍यायिक अधिकारियों की नियुक्ति, स्‍थानान्‍तरण तथा पदोन्‍नति से सम्‍बन्धित मामलों में निर्णय करता है।
  • राज्‍यपाल को अनुच्‍छेद -271 (1) के अनुसार उच्‍च्‍ न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश एवं अन्‍य न्‍यायाधीशों की नियुक्ति के सम्‍बन्‍ध में परामर्श देने का अधिकार है।
  • राज्‍यपाल के अनुच्‍छेद -161 के तहत किसी राज्‍य न्‍यायालय द्वारा अपराधी करार दियो गये किसी व्‍यक्ति की सजा माफ करने , क्षमा करने, दण्‍ड कम करने तथा निलम्बित या विलम्बित करने का अधिकार है। परन्‍तु वह मृत्‍युदण्‍ड की सजा माफ नहीं कर सकता।
  • राज्‍यपाल निम्‍नांकित परिस्थितियों में मन्त्रिपरिषद् भंग करने का अधिकार प्राप्‍त है।
  • जब विधान सभा मन्त्रिपरिषद् के विरूद्ध अवि‍श्‍वास प्रस्‍ताव पास कर दे और मन्त्रि‍परिषद् त्‍यागपत्र न दे।
  • जब मन्त्रिपरिषद् संविधान के अनुकूल कार्य नहीं कर रहा हो।
  • मन्त्रिपरिष्‍ज्ञद् की नीतियों से राष्‍ट्र का अहित सम्‍भावित हो या केन्‍द्र से संघर्ष होने की सम्‍भावना हो।
  • जब कोई स्‍वतन्‍त्र अधिकरण द्वारा जाँच के बाद मुख्‍यमंत्री को भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त पाया हो।
  • राज्‍यपाल, मुख्‍यमंत्री की सलाह पर, विधान सभा को भंग कर सकता है।
  • कुछ विशेष परिस्थितियों में वह मुख्‍यमंत्री की सलाह के बिना भी स्‍वविवेक पर विधान सभा भंग कर सकता है।

दोस्तों आशा है यह Article राज्‍यपाल का कार्य एवं शक्ति : Governer Work & Power In Hindi आपकी प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी में काफी मदद करेगा , ऐसे ही Articles पढ़ने के लिए जुड़े रहे : SSC Hindi के साथ !!

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